वो लडकियां…

टेक्सास के किनारों पर
बेंचो पर पसरी
कच्चे रेशम सी लडकियां
साजिशें नहीं करती।

वे टॉलस्टाय की किताबें ,
दिखाकर पढ़ती हैं और ,
सिमोन दा बोबुआर को
छुपकर पढ़ती हैं।


नाजुक से होंठों वाली,
झीनी पोशाकों में समाई लडकियां ,
मार्ग्रेट के उपन्यासों पर ,
उत्तेजित होती हैं।
शेक्सपियर की कविता पर
आँखों से झर जाती हैं।

छातियों के कोमल उभारो पर इतराती
मर्लिन मुनरो सी लडकियां
गुरूर नहीं करती
नील नदी के पानी सा
हिलोरें मारती हैं

कच्ची केरी सी नरम ,
ये कोरी लडकियां,
एक दिन चुपके से ,
बारिश की बूँदों की तरह ,

बरस जाती है।
तपती रेत से ,
रेगिस्तानी लड़को पर।

निधि नित्या

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