PETROL AUR CYCLE । पेट्रोल और साइकिल।

वो दिन हवा हुए जब मौसम सुहाना होते ही पत्नी, पति से कहती थी “चलिए, कहीं घुमा कर लाइए” . आज तो पति कहते हैं “ऑनलाइन सर्फिंग कर लो और फ़िर भी जी न भरे तो google map पर घूम आओ। फ़िर भी न माने तो उन फ़िल्मी गीतों से प्रेरणा लें जहां साइकिल, प्रेम में बाधा नहीं वरन परम सहायक होती है। PETROL AUR CYCLE की जंग में अंतिम विकल्प cycle ही है। देश में इन दिनों cricket से कहीं ज़्यादा चर्चा “petrol” के शतक की है।

पेट्रोल के नक़्शे कदम पर चल रहे डीज़ल के आत्मविश्वास को भी कम न आंका जाए। आख़िर sachin ने ही sahwag को और hritik ने ही tiger shroff को प्रेरित किया है। वैसे भी पिछले कुछ सालों में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में जो अंतर था वो web series की ‘सभ्य भाषा’ जैसा हो गया है मतलब दिखाई नहीं देता है।

डीज़ल अगर इंसान होता तो मै पेट्रोल से पहले उसका इंटरव्यू लेता। हालांकि पेट्रोल और डीज़ल दोनों का ही इंटरव्यू लेना बहुत मुश्किल काम होता। दोनों सीधे मुंह बात नहीं करते और मै तब भी खीजकर यही कहता कि “दोनों के भाव बढ़े हैं”

PETROL PRICE

सच पूछिए तो हम भारतवासियों ने बुरे सपने में भी पेट्रोल को 100 का होते नहीं देखा। नाचीज़ ने अपनी ख़ानदान में किसी को 100 का होते नहीं देखा तो पेट्रोल के 100 होने की कल्पना तो क्या ही करते। एक दशक पहले भोपाल में पढ़ने वाले इंजीनियरिंग (engineering) के स्टूडेंट अपनी सेकंड हैंड बाइक (bike) में 20 का पेट्रोल डलाकर 15 की चाय पी आते थे और केड़ी भी मार लेते थे।

35 रूपए तीन लोगों में बराबर डिवाइड होते थे। 10, 10 और 15 .  दोस्ती का अपना गणित है। बहरहाल उस दौर में पेट्रोल 50-55 रूपए लीटर था (petrol price) और 20 रु में 400 -450 ml की कहानी बन जाती थी। धक्के मारकर गाड़ी लाता हर स्टूडेंट यही कहेगा कि students के लिए तो पेट्रोल हमेशा ही महंगा था, वो तो दोस्त दिल के अमीर होते हैं, जो कमबख़्त घुमा देते हैं।

PETROL PRICE TOUCHES 100

लॉकडाउन (lockdown) के दिनों में मैने एक व्यंग्य लिखा था।  इसका 5 वां स्टेप वैसे ही प्रासंगिक हो गया है जैसे बिटकॉइन प्रासंगिक हो गया है और उसकी वैल्यू भी बढ़ते जा रही है। पॉइंट ये था सुबह से गाड़ी 5 बार पोंछ चुके हों तो अब उस पर चढ़ जाइये और बच्चों की तरह ब्रूम ब्रूम पी पी करें।  कल्पना करें कि आप शहर में बेरोकटोक घूम रहे हैं । अगर स्टंट करते थे तो दो बाइक्स पर खड़े हो जाइये।

( read full –https://neeroz.in/lockdown-me-kya-karen/ )

उस वक़्त ये सलाह मैने इसीलिए दी थी चूंकि पुलिस मार कम और घसीट ज़्यादा रही थी। इस वक़्त पुलिस की कोई रोक-टोक नहीं है। Since petrol price touches 100, पेट्रोल का शतक ही प्रेरित कर रहा है कि गाड़ी चलाई न जाए। बाहर निकालें, पोंछें और वापिस खड़ी कर दें। पैदल चलने से भी सेहत अच्छी रहती है।

CYCLE । CYCLE TIME ।

पैदल चलने का एक फ़ायदा और है… लाइसेंस नहीं रखना पड़ता। कल छोटे भाई का लाइसेंस बनवाने के लिए एक बाबू ने अप्रत्यक्ष और अभद्र तरीके से रिश्वत मांगी तो मैने तुरंत आरटीओ अफ़सर से शिकायत की। अपनी साइकिल (cycle) खड़े करते हुए उन्होने यही कहा “मै अभी उस बाबू की ख़बर लेता हूँ।” बहरहाल पेट्रोल महंगे होने का पॉज़िटिव साइड यही है कि लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या कम होगी।

INTERNATIONAL PETROL PRICE

इस वक़्त एक बैरल ( लगभग 159 लीटर ) तेल की कीमत international petrol price 163 डॉलर ( 11,851 रूपए लगभग ) है ,लेकिन lockdown के एक महीने बाद जब दुनिया भर में गाड़ियों के पहिए वैसे ही थम गए थे जैसे प्रश्न पत्र देखने के बाद स्टूडेंट की सांसे थम जाती हैं। तब अप्रैल 2020 में तेल की कीमत (international petrol price)17 $ प्रति बैरल तक गिर गई थी ( मंजे 1224 रु का 159 लीटर, बोले तो 7 रु प्रति लीटर ).

आर्थिक संकट के उस तूफ़ान में हम सबकी नैय्या गोते खा रही थी। दिन भर अलसाए अजगर की तरह पड़े-पड़े हम भी कल्पना लोक में तैरने लगे… केंद्र और राज्य के टैक्स के बाद एक दिन के लिए भी पेट्रोल 15 रु लीटर हो जाता तो हम भी अपनी गड्डी दी  fuel tank capacity को संतुष्ट कर देते। हम भी कह लेते pawri ho rahi hai. हम भी शान से 100 का नोट देकर पेट्रोल पंप पर राजाओं की तरह कहते “6 लीटर” और 10 रूपए वापिस भी ले लेते।

मगर ये हो न सका

मगर ये हो न सका।

श्रेणी – व्यंग्य

IMROZ FARHAD

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