PARYAVARAN PRADUSHAN | पर्यावरण प्रदूषण | 1 beautiful hindi poem |

प्रकृति हमसे रूठी हुई है और ये बात किसी से छुपी नहीं है । विश्व पर्यावरण दिवस पर एक कविता paryavaran pradushan पाठकों के लिए प्रस्तुत है |

विश्व पर्यावरण दिवस, कहता है हम सबसे
नहीं किसी देश विशेष का है, इसे वैश्विक मुद्दा समझें

आज पानी गर्म है, फ्रिज में तुम ठंडा करते
कुए की ठंडक में नहाओ, ऐसा कुछ क्यों नहीं करते

बेशक गर्मी बढ़ रही है, AC कूलर फ्रिज चल रही है
रिमोट से दुनिया चल रही है, क्या खूब जिंदगी कट रही है

कमरे को ठंडा तो कर लिया, क्या शहर को ठंडा कर पाओगे?
पृथ्वी को जो ठंडा करें, अरे “ऐसी AC कब बनाओगे? “

बंद हुई जो कुछ दिन दुनिया, हो गई तुम्हें बेचैनी
फिर मिलेगी आजादी, कर लेना फिर मनमानी

PARYAVARAN PRADUSHAN | पर्यावरण प्रदूषण | HINDI POEM |

credit – publicdomainpictures

फिर थूकना सड़कों पर तुम, फैलाना प्लास्टिक जितनी मर्जी
फिर भरना जहर हवा में, नदियों में नालों का पानी

प्रदूषण जो कुछ कम हुआ, हो गई तुम्हें हैरानी
कुछ दिन रुक जाओ कहना, करें नई शैतानी

आसमान फिर होगा काला, जो हुआ है आसमानी
फिर होगी धूमिल हरियाली, फितरत है ये अब इंसानी

विश्व पर्यावरण दिवस, कहता है हम सबसे
नहीं किसी देश विशेष का है, इसे वैश्विक मुद्दा समझें

आज पानी गर्म है, रिच मैन तुम ठंडा करते
कुए की ठंडक में नहाओ, ऐसा कुछ क्यों नहीं करते

अविनाश पटेल

neeroz में हम पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की गंभीरता को समझते हैं और पर्यावरण की सुरक्षा करना, उसके स्वरुप को बनाए रखना अपना परम कर्तव्य। प्रकृति हमसे रूठी हुई है और ये बात किसी से छुपी नहीं है। आइये इस पर्यावरण दिवस पर संकल्प करें की सदैव इसके हित को अपना हित समझेंगे। पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं।

एक कविता प्रेम और वियोग पर – http://neeroz.in/nirvaat/

hindi rhyme for kids – https://youtu.be/yrynT4T55Xc

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