निर्वात

निर्वात होता है जहां

प्राणवायु नहीं होती,

निर्वात होता है जहां

सब शून्य होता है |

जब रिश्तों की

गर्माहट खो जाए,

जब संबंधों का

सौंदर्य मुरझा जाए |

अपनेपन और अधिकार

का एहसास

तनिक भी न

शेष हो,

तब दो इंसानों

के मध्य

कुछ न होना

“निर्वात” है |

इमरोज़ फ़रहाद

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