MUGHAL E AZAM – 60 years of eternal love saga

चूंकि मैं एक writer हूँ मेरा इस बारे में लिखना ज़रूरी है कि writers को कब,कहां और किस तरह इज़्ज़त से नवाज़ा गया।  आज Mughal E Azam का ज़िक्र इसीलिए कि bollywood की इस one of the best, evergreen और classic मूवी के आज 60 साल हो गए। जी हां, 60 साल। Mughal E Azam के 60 साल पूरे होने पर इस फ़िल्म और उसके screenplay writer को एक बड़े honour से नवाज़ा गया है।

Academy of Motion Pictures Arts and Sciences (AMPAS ) ने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फ़िल्म लाइब्रेरी में इसे सहेज के रख लिया है। K ASIF के बेटे Akbar Asif ने AMPAS  की Margaret Herrick को स्क्रीनप्ले की कॉपी दी।

मौजूदा हिंदुस्तान के लाखों घरों में जो सबसे उम्रदराज़ शख़्स होंगे, उनकी उम्र होगी 60 बरस। कुछ घर और ख़ुशनसीब भी होंगे जिनके घर कोई 80 या 90 बरस के बुज़ुर्ग भी होंगे। अगर होंगे तो उन्हें भी अपनी जवानी के दिनों में रिलीज़ हुई Mughal E Azam के dialouges और songs ज़रूर याद होंगे।

ये वो फ़िल्म है जिसे हिंदुस्तान की तीन पीढ़ियों से देखा है।  जिसके बारे में सुना है। मुझे यकीन है कि आज का blog इतना पुरअसर (impactful ) होगा की चौथी पीढ़ी (4G ) भी इसके बारे में और इसकी अहमियत के बारे में ज़रूर जानेगी।

MUGHAL E AZAM MOVIE

1960 में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म को डायरेक्टर K. ASIF ने बनाया था। इसे Shapoorji pallonji ने प्रोड्यूस किया था ( आप इनकी इस पीढ़ी को भी richest men in india के हमारे ब्लॉग में देख सकते हैं ). यह फ़िल्म मशहूर drama ‘anarkali’ पर बेस्ड थी जिसे urdu dramatist imtiaz ali taj ने लिखा था।

इसे फ़िल्म बनाने के लिए urdu writers Amanullah Khan, Wajahat  Mirza, Kamaal  Amrohi, and Ehsan  Rizvi  जैसे दिग्गजों को ज़िम्मेदारी दी गई। नतीजा, फ़िल्म के हर dilaouge में poetic expression दिखाई देते हैं। Mughal E Azam को बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस फ़िल्म की शूटिंग 1946 में किन्ही और कलाकारों के साथ शुरू की गई थी लेकिन 1947 में दंगे और विभाजन के कारण फ़िल्म रुक गई।

shapoorji ने जब फ़िल्म को प्रोड्यूस करने की इच्छा जताई तब K ASIF ने अकेले इस फ़िल्म को बनाना तय किया। इस बार Prithviraj kapoor,dilip kumar, madhubala को क्रमशः बादशाह अकबर, शहज़ादा सलीम और अनारकली के रोल के लिए चुना गया। उस दौर में साधन कम थे, सुविधाएं न के बराबर थी लेकिन रातोंरात स्टार बनने की ख़्वाहिश किसी की नहीं थी और काम का जूनून इस कदर था कि रेगिस्तान पर नंगे पैर चलने से prithviraj kapoor के पैर में छाले  आ गए थे और हार्ट डिसीज़ और सेट में लाइट्स की गर्मी से Madhubala बेहोश हो जातीं थी, लेकिन फ़िल्म ज़रूर पूरी होती थीं।   

MUGHAL E AZAM SONGS

credit – navhindtimes

इस फ़िल्म के गानों को भी वही मर्तबा हासिल है जो फ़िल्म को हासिल है। Indian classical music और folk music से इंस्पायर्ड इस फ़िल्म के soundtrack की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। K ASIF, इस फ़िल्म के संगीत के लिए Naushad के पास पैसों से भरा ब्रीफकेस ले गए और कहा कि मुझे Mughal E Azam के लिए यादगार मौसिक़ी ( music ) चाहिए। Naushad को पैसों से उम्दा काम लेने की ये बात बहुत बुरी लगी और उन्होने पैसे खिड़की से बाहर फेंक दिए (सोचिए क्या लेवल था आर्टिस्ट्स का उस वक़्त, जब आप अपने घर में बुज़ुर्गों से ethics की बात सुनेंगे तो ज़रूर relate कर पाएंगे ).

बहरहाल किसी तरह उन्हें मनाया गया और shakeel badayuni ने फ़िल्म के गाने लिखे। k asif चाहते थे Mughal E Azam में bade ghulam ali khan भी हिस्सा बनें लेकिन उन्होने ये कहकर मना कर दिया कि उन्हें फिल्मों में काम करना पसंद नहीं। ज़िद पर अड़े k asif ने फीस पूछ ली जिस पर bade ghulam ali khan ने 25000 एक गाने की फ़ीस कह दी ये सोचकर कि इतनी बड़ी रक़म कोई दे ही नहीं सकता। लेकिन k asif मान गए और उन्हें गाना पड़ा।

बहरहाल  Mohe Panghat Pe और Pyar Kiya To Darna Kya जिन्हे lata Mangeshkar ने अपनी आवाज़ दी और Ae Mohabbat Zindabad जिसे Mohammed Rafi ने गाया इस फ़िल्म के वो popular songs हैं जिन्हे आज भी बहुत सुना जाता है। Mughal E Azam में सिर्फ़ गानों का बजट इतना ज़्यादा था जितने में उस वक़्त एक regular movie बन जाती थी।

https://www.youtube.com/watch?v=6Au_J6jHKE0 ( song here)

pyar kiya to darna kya को technicolor में बनाया गया। विदेशी तकनीशियनों की सहायता ली गई। बहुत सारे reflectors और अनगिनत इंतज़ामों से ये अविस्मरणीय (unforgettable ) गीत तैयार हुआ।

MADHUBALA AND DILIP KUMAR IN MUGHAL E AZAM  

इस बात में ज़र्रा बराबर शक नहीं कि इस फ़िल्म से dilip kumar और madhubala हिन्दी सिनेमा में अमर हो गए। दिलीप साहब तो अब भी हमारे बीच हैं और उनके फैंस यही चाहते कि वो स्वस्थ रहें। Mughal E Azam के बारे में एक ब्लॉग में लिखना नामुमकिन ही है। इसे great makers, actors, musicians, singers ने बनाया है। इससे जुड़े सैकड़ों किस्से हैं और हर किस्सा बहुत दिलचस्प। 1960 में इसे तकरीबन 1 से 1.5 करोड़ रूपए में बनाया गया। ऐसी evergreen,classic और one of the greatest MUGHAL E AZAM को neeroz का ट्रिब्यूट।

IMROZ FARHAD

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