MERE RASHKE QAMAR TUNE PEHLI NAZAR जब लफ़्ज़ों पे डाली मज़ा आ गया

इस बात में तो ज़र्रे बराबर शक नहीं कि हिंदी में उर्दू इस तरह घुल मिल गयी है की एक ही जान पड़ती है | उर्दू के ऐसे बहुत से लफ्ज़ हैं जिनका इस्तेमाल हिंदी जानने वाले बहुत आसानी से कर लेते हैं | इसीलिए क़व्वाली और ग़ज़लों के अलावा हिंदी गानों या हम कहें कि बॉलीवुड सॉंग्स में उर्दू का बखूबी इस्तेमाल होता है | तो उन चंद मशहूर गानों और अल्फाज़ों की बात करते हैं, जो धीरे-धीरे लोगों की ज़ुबां पर चढ़ गए और आजकल जिन्हें खूब सर्च किया जाता है |

इस ब्लॉग का टाइटल तो समझ ही गए होंगे और बहुत मुमकिन है कि आपने इस मशहूर क़व्वाली में आए इन  बोल के मायने भी उस्ताद गूगल से दरियाफ़्त कर लिए हों, लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो हम बताये देते हैं | अरे भई गूगल सी सख़ावत हममें भी है |

रश्क-ए-क़मर ( RASHK-E-QAMAR )

सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है की यहाँ क़मर ( क के नीचे नुक्त़े पर ग़ौर फ़रमाइए, ये नुक्त़े अगर मै न लगाऊं तो बड़ी नुक़्ताचीनी हो ) का मतलब है चाँद | रश्क का मतलब जलन | “रश्क-ए-क़मर” का मतलब हुआ जिसकी ख़ूबसूरती से चाँद भी जले | नाचीज़ को तो अबतक ऐसा कोई दिखाई नही दिया । अगर आपको दिखे तो आप अपने रिस्क पर भी न बोलें क्यूँकि शायरी तो शायरो का काम है उन्ही पर छोड़ दीजिये ।

उल्फ़त ( ULFAT )

एक गाना है जो जिस्म में हलचल पैदा कर देता है और मन करता है इसे सुनकर थोड़ा झूम लें | जिसके बोल हैं “लोचा- ए- उल्फ़तजिसे फिल्म two states में सुनागया । लोचा तो मुंबईया शब्द है लेकिन “उल्फ़त” को लेकर ज़रूर कुछ बात ज़हन में आ सकती है । 1973 की फिल्म ‘दिल की राहें’का क्लासिक सॉन्ग “रस्म ए उल्फ़त” कैसे भूला जा सकता है । 46 साल बाद भी उर्दू का असर बरक़रार है । “उल्फ़त” के मायने हुए प्यार,आकर्षण,रोमांस । 

सेहरा ( SEHRA )

हमने फिल्मी पर्दे पर जब भी कोई फ़साना देखा तो हीरो को ही गाते और शायरी और मौसिकि से प्यार करते देखा लेकिन मेरे अजीज़ दोस्तों एक फिल्म है जिसे हिंदी सिनेमा में सबसे मक़बूल फिल्म का मक़ाम हासिल हए उसी फिल्म के विलेन को मौसिकि से प्यार है । पहाड़ियों के पीछे उसके ठिकाने पर सब थिरक रहे हैं । गाने के बोल हैं गुलशन मे गुल खिलते हैं जब “सेहरा” में मिलते हैं मै और तू । गाना तो आप पहचान गए होंगे और सेहरा के दो मायने होते हैं एक तो दूल्हे का सेहरा( जो कि यहाँ हो नही सकता ) दूसरा है रेगिस्तान । तो अब आप समझ गए, कि सेहरा बाँधा भी जा सकता है और सेहरा में आप किसी से मिल सकते हैं, जैसे ऊंटों से ।

धनक ( DHANAK )

अब आप कहेंगे ये कैसा उर्दू लफ्ज़ है | ये तो हिंदी शब्द है और हमने हजारों बार सुना है | बिल्कुल है और उर्दू में भी एक धनक होता है | एक मशहूर गाने का अंतरा आपको बताते हैं “तुमने देखी है धनक तो, बोलो रंग कितने हैं, सात रंग कहने को, फ़िर भी संग कितने हैं” मुखड़ा था ये तारा, वो तारा हर तारा और इस बेहद नफ़ीस, बेहद उम्दा फिल्म का नाम था स्वदेस | “धनक” के मायने हैं इन्द्रधनुष | इस तरह म्यूजिक लवर कह सकते हैं, जिंदगी बड़ी बेमज़ा हो जाएगी अगर उसमें ‘मौसिकी’ की “धनक” न हो |

शरीर ( SHAREER )

तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा, तू धुप की तरह बदन को छू ज़रा… शरीर सी ये मुस्कुराहटें तेरी, बदन में सुनती हूँ मैं आहटें तेरी | ‘शरीर’ ? क्या मैंने सुना “शरीर” सी मुस्कुराहटें तेरी ? आप शायद इस सुपर फ्लॉप फ़िल्म युवराज को भूल गए होंगे पर इसके गाने भूलने जैसे नही है | जब ये गाना मैंने पहली बार सुना था, तभी मै भी मुस्कुरा उठा क्यूंकि हिन्दी में शरीर का अर्थ body है तो उर्दू में “शरीर” का मतलब है शरारती | तो अगर आप किसी बड़े को सुनें जो किसी बच्चे को डांट रहा हो “तुम बहुत शरीर हो गये हो” तो समझ जाएँ जनाब कि उनके SENTENCE का SYNTAX और SEMANTICS दोनों दुरुस्त हैं |

रुसवा ( RUSWA )

इसके बिना ये पोस्ट पूरी नहीं होती क्यूंकि ये मेरा पसंदीदा गाना है | वैसे ये बात भी उतनी ही सच है की किसी शख्स़ का एक पसंदीदा गाना नही होता | ये वो गाना है जो आपके ऊपर की दो पुश्तों ने ज़रूर सुना होगा | Mr X in Bombay ( हमें ताज्जुब और ख़ुशी दोनों होते हैं की 60s में हम science fiction बनाने की तरफ़ कदम रख चुके थे ) में किशोर दा का गया गाना हर उम्र के लोगों को पसंद है “मेरे महबूब क़यामत होगी, आज ‘रुस्वा’ तेरी गलियों में मुहब्बत होगी |  “रुस्वा” के मायने हुए अनादृत, अपमानित, dishonored,disgraced

तो इस तरह बोलती फ़िल्मों से लेकर अब तक डायलॉग्स और गानों में उर्दू का इस्तेमाल बदस्तूर हुआ है और ख़ाकसार को लगता है ये ता-क़यामत जारी रहेगा | जानने वाले इनका लुत्फ़ लेते रहेंगे, नही जानने वाले तलाशेंगे फ़िर लुत्फ़ लेते रहेंगे | हम आपके लिए इसी तरह और हम आपकी मालूमात में इज़ाफ़ा करने की कोशिश करते रहेंगे | बेशर्त ! बेइंतेहा !

[ दरयाफ़्त – हासिल, प्राप्त    सख़ावत – दरियादिली

नुक़्ताचीनी – आलोचना      मौसिकी – संगीत इज़ाफ़ा – बढ़त, वृद्धि ]

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