LT Company – short story in hindi

SHORT STORY IN HINDI

LT company incoming call…

स्क्रीन फ़्लैश हुई तो अरमान ने धीरे से कॉल पिक किया पर वो कुछ बोला नहीं | फ़ोन के दूसरी तरफ़ मौजूद शख़्स ने भी कुछ नहीं कहा | अभी 3-4 मिनिट ऐसी ही ख़ामोशी क़ायम रहेगी| दोनों कुछ नहीं बोलेंगे | रात के 12. 30 बजे हैं और इस वक़्त फ़ोन कॉल से अम्मी की नींद तो नहीं टूटनी चाहिए न | वैसे भी अब्बू के गुज़रने के बाद इस घर में सिर्फ़ वही तो है जिसे अम्मी का पूरा ख़याल रखना है |

अरमान बिना आहट, सधे हुए कदमों से दरवाज़े तक पहुंचा | इतने धीरे हैंड ड्राप खींचा कि उसके अपने कानों को भी ख़बर न हो | लेकिन… आवाज़ हो गई | कितनी भी कोशिश करो, आवाज़ हो ही जाती है | जब कोशिश करो कि आवाज़ न हो, तब तो ज़रूर होती है |

“अरमान” – अम्मी ने आवाज़ दी |

“शिट” अरमान धीरे से फुसफुसाया | फ़िर ज़ोर से बोला,” जी अम्मी, आया। ” ( अरमान ने कॉल कट कर दिया )

“सोया नहीं अब तक तू ?” अम्मी ने अरमान की चेहरे पर काम की थकान के बाद भी जागने की ख़ुशी देखी |

“नही अम्मी, बस वो ‘COMPANY’ का एक ज़रूरी कॉल था, फ़िर सोता हूँ। “

अम्मी मुस्कुरा दी।

“अच्छा सुन।  यहाँ बैठ।”

( अरमान अम्मी के बिस्तर पर ही बैठ गया।  अम्मी की चमकती पेशानी ( माथा ), आँखों में नूर हर वक़्त ही होते हैं ; लेकिन ये मुस्कराहट, ये थोड़ी अलग है । ये मुस्कराहट क्यूँ ? )

HINDI STORY SHORT

अम्मी – “इतना काम करता है दिन भर ऑफिस में, कम से कम खाना तो सुकून से खाया कर”

अरमान – “हाँ । खाया न, खाना तो। “

अम्मी – “तो कुछ फ़र्क़ महसूस नहीं हुआ ?”

अरमान – “फ़र्क़ ? अच्छा बना था।  रोज़ की तरह ।”

अम्मी ने लम्बी सांस लेकर कहा “बताना ही पड़ेगा”

अरमान को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वो बस अम्मी को देखे जा रहा था। 

“आज तेरी ‘COMPANY’ घर आयी थी।  कोई क़िताब वापिस करने।  तू कबसे रुबाईयाँ पढ़ने लगा ?”

उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो । 

“जी,,, वो अम्मी” अरमान बस इतना ही कह पाया । 

“वो तो बच्ची नेक थी।  मैंने उससे पूछा और उसने सब बता दिया। वरना सच बोलने में तो सबकी ज़ुबान घुलती है।  मैने फ़िर बिठा लिया तेरी कंपनी को,,, बहुत से सवाल किए उससे।  पढ़ाई के बारे में, उसके घर के बारे में, उसके वालिदैन ( माता -पिता ) के बारे में। ” अम्मी ने अरमान की हथेली, अपनी दोनों हथेलियों में थाम ली।

“बहुत प्यारी और ज़हीन है।  मैने सोचा देखूं हाथों में ज़ायका भी है या नहीं, तो खाना भी उसी से बनवा लिया।” अम्मी बड़े इत्मिनान और प्यारी  से बोल रहीं थी प्यारी सी मुस्कान उनके लबों पे सजी थी।

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“जल्दबाज़ी की न ? फ़िर शायद बहुत देर हो जाती । तुम्हे पसंद है। लड़की भी अच्छी है। मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता था। बात करती हूँ उसके वालिदैन से। तब तक वक़्त पर खाया करो और वक़्त पर सोया करो।” अम्मी ने अरमान के सिर पर हल्की सी चपत लगाई।

अरमान के हलक़ में तो जैसे आवाज़ आकर गुम हो गयी।  कुछ बोलते ही नहीं बन रहा था।  उसने ज़ोर से अम्मी को गले लगा लिया। दो आंसू गालों का सफ़र करते कहीं गुम हो गए।

“आप न वर्ल्ड की बेस्ट अम्मी हो”

“वो तो मै हूँ ही | चल जा सो जा जाकर ।

(अरमान अपन कमरे की तरफ़ चल दिया …)

“और सुन ये LT Company क्या है ?” अम्मी ने सवाल किया |

इस बार अम्मी नहीं अरमान मुस्कुराया…

“LIFETIME COMPANY”

IMROZ FARHAD

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