FIRST WOMAN TO CLIMB MOUNT EVEREST FROM MADHYA PRADESH | BHAWNA DEHARIYA | मध्य प्रदेश से एवरेस्ट चढ़ने वाली प्रथम महिला | भावना डेहरिया |

आपने सुना होगा first woman to climb mount everest के बारे में लेकिन क्या आपने सुना या पढ़ा first woman to climb mount everest from madhya pradesh के बारे में ?  हम सब सपने देखते हैं | कुछ बंद आँखों से, कुछ खुली आँखों से | सपने जो नींद में आते हैं | सपने जिनकी मधुर स्मृति में हम मुस्कुराते रहते हैं | पर कुछ अदम्य साहस वाले लोग ऐसे सपने देखते हैं, जो उन्हें सोने नहीं देते | ऐसे सपने, जिन्हें देखने के बाद वो मुस्कुराते तभी हैं, जब उस सपने को पूरा करते हैं |

आज के ब्लॉग में बात करेंगे ऐसी ही एक पर्वतारोही (mountaineer ) की, जिनके हिमालय से मनोबल और दृढ़-निश्चय ने उन्हें सोने नहीं दिया और वो मुस्कुराईं, तब, जब वो दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर पर थी, जब वो mount everest पर थीं |

beginning of Bhawna Dehariya | तामिया से शुरुवात |

तामिया ( tamia ) जैसी छोटी सी जगह से ताल्लुक रखने वाली भावना ने कैसे तय किया दुनिया के सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला हिमालय ( the Himalaya ) की सबसे ऊंची चोटी mount everest का सफ़र | इसके लिए हमें तामिया ही जाना होगा | मै आपको लेकर चलता हूँ, क्यूंकि मै तामिया में रहा हूँ | मध्य प्रदेश ( madhya pradesh ) के छिन्दवाड़ा जिले में तामिया, famous tourist place pachmari से करीब 80km दूर है, chhindwara जिला मुख्यालय से करीब 55 km | tamia भी pachmari जैसा ही है | सुन्दर,शांत, हरा-भरा |

turning point in school life | छात्र जीवन में आया बड़ा मोड़ |

स्कूल में पढ़ने वाली bhawna की sports में बहुत दिलचस्पी थी | खेलकूद में हमेशा अव्वल bhawna ने स्कूल के दौरान basketball और cycle polo में नेशनल भी खेला | 2009 में हुए एक एडवेंचर स्पोर्ट्स प्रोग्राम उसकी ज़िन्दगी में बड़ा बदलाव लेकर आया | तामिया के पास पातालकोट ( patalkot,जो भारत में एक प्रसिद्ध स्थल है ) में उन्होने rock climbing में गज़ब का प्रदर्शन किया | bhawna को उसी प्रोग्राम में mountaineering के बारे में पता चला और उसने mountaineering में ही career बनाने की ठान ली |

prize money became fuel | प्राइज मनी बनी ईंधन |

भोपाल से bachelors in physical education करने के साथ-साथ bhawna ने बहुत से adventurous activities कीं | इन सबसे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और फ़िर उन्होंने उत्तरकाशी स्थित Nehru Institute Of Mountaineering में अप्लाई किया | भोपाल की अपनी पढ़ाई के अलावा इस course की फ़ीस और ट्रेनिंग का खर्चा उठाना परिवार के लिए बहुत मुश्किल था | ख़ुद bhawna अपने एक भाई और एक बहन की पढ़ाई का ख़र्च भी उठा ही रहीं थी, पर हार मानना bhawna ने सीखा ही नही था | सपनों के हवाई जहाज़ उड़ाने के लिए ‘ईंधन’ चाहिए होता है | स्कूल और कॉलेज के समय मिली सारी ‘prize money’ को  उन्होंने ‘ईंधन’ बना दिया |

A grade से mountaineering का basic programme किया | फ़िर advance programme भी किए | 6000 मीटर से भी अधिक ऊंची मनीरंग चोटी और डी.के.डी चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने के बाद, mount everest का सपना उन आँखों में पलने लगा | लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए कड़े प्रशिक्षण और बहुत मज़बूत मानसिक स्थिति ही नहीं, 28 लाख रूपए की भी ज़रुरत थी | एक मध्यम वर्गीय परिवार की लड़की के लिए ये रकम जुटाना असम्भव सा ही था, उनकी उम्मीद अब टूटने लगी…

Mount Everest climber – dream came true | सपने का पूरा होना |

निराश bhawna ने ख़ुद पर एक बार फ़िर से यकीन किया और profile बनाकर sponsership के लिए जुट गई | जाने कितने दफ़्तरों के चक्कर लगाए, अनेक उद्योगपतियों और नेताओं से मिलीं पर कहीं से मदद न मिली | लोगों ने मज़ाक उड़ाया, इतने छोटे से ब्लॉक ( कस्बे ) की लड़की और इतना बड़ा सपना | पर हार मानना bhawna ने सीखा ही नहीं था | तबमुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने तत्परता दिखाते हुए यह रकम दिलाई |

भोपाल से काठमांडू { from Bhopal to Kathmandu ( in Nepal ) } पहुंचकर, 6 अप्रैल से शुरू हुई इस यात्रा में तमाम मुश्किलें आईं | अंतिम पड़ाव में oxygen cylinder में समस्या आने से जान जाने तक की नौबत आ गई लेकिन परमेश्वर में आस्था और ख़ुद पर उनके यकीन से वो 22 मई 2019 को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंची और शान से तिरंगा लहराया | इस तरह madhya pradesh’s first ever woman to climb mount everest बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया |

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