BEST OF HINDI SHAYARI | बेस्ट हिंदी शायरी |

हमारे हिंदुस्तान में उर्दू और हिन्दी इस तरह घुले मिले हैं कि BEST OF HINDI SHAYARI में आज हम उर्दू के सबसे मक़बूल ( लोकप्रिय ) शायरों के सबसे मशहूर शेर का लुत्फ़ लेंगे | यहाँ तक कि इन शेरों को मै devanagari script  में लिख रहा हूँ ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसे पढ़ें और हमारे बेहतरीन शायरों के फ़लसफ़े के थोड़े और करीब आ जाएं |

मिर्ज़ा ग़ालिब | MIRZA GHALIB |

 यूँ तो लोग हर टूटी फूटी शायरी को ग़ालिब का नाम देते हैं लेकिन असल में शायरी की दुनिया में कभी कोई ग़ालिब जैसा हुआ ही नहीं | ग़ालिब  ने तकरीबन हर मौज़ूं ( topic ) पर उम्दा शायरी लिखी है जो न सिर्फ़ urdu बल्कि persian में भी शायरी लिखीं | उन्हें Dabir-ul-Mulk जैसे अहम् ख़िताब से नवाज़ा गया था |

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन

दिल के खुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख्याल अच्छा है – मिर्ज़ा ग़ालिब

बशीर बद्र | BASHIR BADR |

padma shri और sahitya academy award ( urdu ) से सम्मानित बशीर साहब की ग़ज़लों और शेर बाकी शायरों से काफ़ी अलग होते हैं | वो ग़ैर उर्दू लफ़्ज़ों का इस्तेमाल भी अपनी उर्दू शायरी में बख़ूबी करते हैं | उनके शेर MA urdu के syllabus में हैं और गाहे बगाहे parliament में MPs के मुँह से भी सुने जा सकते हैं |

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो

न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए – बशीर बद्र       

राहत इंदौरी | RAHAT INDORI |

देश और दुनिया में शायद सबसे ज़्यादा उर्दू मुशायरे Rahat साहब ने ही किए हैं | इंदौर से ताल्लुक रखते हैं और मुशायरे के अपने बेहद निराले अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं | WAH WAH KYA BAT HAI और KAPIL SHARMA SHOW में वो आ चुके हैं | “vah bulati hai magar jaane ka nahi” social media पर किस कदर viral है, ये तो आप भी जानते हैं |

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है – राहत इंदौरी

दाग़ देहलवी | DAAGH DEHLVI |

दाग़ के वतनपरस्त वालिद ने british civil servant william fraser को मारा था |  दाग़ को Mohammad Ibrahim Zauq से शायरी की बारीकियां सीखने का मौका मिला | दाग़ हैदराबाद में nizam mahbub के दरबारी कवि थे | ख़ुद daagh dehlvi के शागिर्दों की बात करें तो उसमें allama iqbal और jigar moradabadi जैसे उम्दा शायर हैं |

वफ़ा करेंगे , निभाएंगे , बात मानेंगे

तुम्हे भी याद है कुछ ये कलाम किस का था – दाग़ देहलवी

निदा फ़ाज़ली | NIDA FAZLI |

fazli साहब को poetry की inspiration मंदिर में भजन गाते हुए एक शख्स से मिली | padma shri से नवाज़े गए फ़ाज़ली साहब अपने शुरुआती दिनों में dharmayug और blitz magazine में लिखते थे | “तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है” जैसा सदाबहार गीत उनकी कलम से निकला,तो वहीँ “होश वालों को ख़बर क्या” जैसी ग़ज़ल से वो हम सबके दिलो दिमाग़ में आज भी हैं |

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

जिसको भी देखना कई बार देखना – निदा फ़ाज़ली

उर्दू शायरों और उनके नज़रिए की हिंदुस्तान की तारीख ( history ) में न सिर्फ़ बहुत अहमियत है बल्कि इंसानियत, अमन, मुहब्बत के लिए वे लिखते रहे और इंसान के हुकूक ( rights ) के लिए लड़ते रहे | सियासी ( political ) ताकतें उनकी कलम को रोक न सकी और न ही कभी नफ़रतों के बाज़ार उनकी ‘ज़िन्दगी की चाल’ बदल सके |

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