सोशल मीडिया पर news या information देने का सही तरीका

msg1 : ये गाड़ी नागपुर – जबलपुर मार्ग में पलट गयी है | सभी सवार गम्भीर रूप से घायल हैं | इस मैसेज को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि ये उनके परिजनों को मिल जाए |

msg2 : ये बालक गुम गया है | इसे खूब शेयर करें ताकि ये अपने माता पिता से मिल जाए |

msg3 : मेरा नाम पूजा है | मै बीकॉम सेकंड इयर की स्टूडेंट हूँ | मेरा लीवर ट्रांसप्लांट होना है | हॉस्पिटल ने 33 लाख का खर्च बताया है | अगर आप इसे शेयर करेंगे तो per share मुझे एक रूपए मिलेगा |

ऐसे मैसेज आपको भी ज़रूर आते होंगे | क्यूंकि जब 5 रूपए दिन में 1.5 gb डेटा मिले तो सारे बेरोज़गार, बेअक्ल, और watsapp university graduate तो मुफ़्त सेवा देंगे ही | तो क्या हैं ये msg, कैसे इनकी सच्चाई पता की जाए और क्या सच में इन msg से किसी को फायदा होता है ?

क्या है इन msg की सच्चाई

इस पोस्ट को पढ़ते हुए अनेक लोग कहेंगे कि हमें तो पता ही है कि fake msg/ fake news होती है | लेकिन निश्चित रूप से ऐसे लोग भी हैं जो इन्हें फॉरवर्ड करते ही हैं, ये सोचकर कि technology का सदुपयोग करें | इससे किसी का भला हो जाएगा | ऐसी नीयत रखना गलत भी नहीं है, पर सवाल है कि हमारी ज़िम्मेदारी का सही स्वरुप क्या होना चाहिए ?

इस ब्लॉग को लिखने से पहले मैंने व्यक्तिगत रूप से सोशल मीडिया में प्राप्त मैसेज में दिए गए नंबर्स पर कांटेक्ट किया, जिनमें से 90% नंबर अस्थायी रूप से बंद हैं | हमारे देश के कुछ बहुत प्यारे नागरिक किसी से बदला लेने या किसी को परेशान करने के लिए ही अक्सर ऐसे महान मैसेज की रचना करते हैं |

जब इन नंबर्स पर बार-बार कॉल जाता है तो मजबूरन सामने वाले को वो नंबर बंद करना पड़ता है | बहुत सी लड़कियों को भी इसी तरह परेशान किया जाता है | आम तौर पर मैसेज पाने वाला हर व्यक्ति उस नंबर की जांच नही करता, न ही अधिकांश लोग मदद करते हैं पर अगर मैसेज झूठा हुआ तो ये किसी व्यक्ति या परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित ज़रूर करता है |

आधी अधूरी जानकारी से नहीं होता कोई लाभ

शुरुआत में दिए गए तीनों msg पर गौर करिए | जबलपुर से नागपुर के बीच दूरी 270 किमी रोड और 542 किमी रेल से है | अमूमन  मैसेज में थाना क्षेत्र, कोतवाली, गाँव नहीं दिया होता | ये जानकारी भूले भटके किसी ने टाइप कर भी दी तो भी date और time डालने की बुद्धिमानी प्रायः लोग नही दिखाते | मुफ़्त का मैसेज है, बस भेजे जाओ | यही कितनी बड़ी मानव सेवा है |

msg2 देखिये | नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक साल 2016 में एक लाख से अधिक बच्चे गायब हो गये | देश में 40 करोड़ की आबादी की उम्र 18 से कम है | 3 लाख से ज्यादा बच्चे भीख मांग रहे हैं | ऐसे में महान विशेषज्ञ केवल एक बच्चे की फोटो फॉरवर्ड करके कहते हैं, इसे माता पिता तक पहुंचाइये |

किस date,time में, किस specific location में बच्चा मिला, किस थाने में सूचित किया गया, थाने का नंबर, किसी पुलिसकर्मी का, किसी NGO का नंबर, कुछ नही दिया होता | बस मेसेज फॉरवर्ड करिए और दिव्य शक्तियों की मदद से बच्चा सीधे घर पहुँच जाएगा | क्यूंकि मैसेज कंपोज़ करने वाला शिक्षित नही है, ये तो बच्चे की गलती है न |

msg3 देखें, पता नही कौन लड़कियों या लोगों की तस्वीर और नंबर यहाँ से वहां शेयर किए जाते हैं | watsapp और facebook की पॉलिसी आप पढ़ सकते हैं | सोशल मीडिया साइट्स लगातार ख़ुद को इम्प्रूव करने में लगे हैं और चाहते हैं कि आप spam ( अवांछित ईमेल, मैसेज या कॉल ), hoax ( अफ़वाह ) और इन्टरनेट पर होने वाली किसी भी जालसाज़ी से बचें |

आप ही क्यूँ ?

वैसे तो मानवता का उत्थान करने वाले मैसेज सबको ही मिलते हैं | इनमें से कोई 5% सच भी होते हैं | 95% मैसेज गुमराह करने वाले या समय ख़राब करने वाले होते हैं | मैंने journalism & communication में ग्रेजुएशन करते वक़्त ये बात सीखी कि वही ख़बर या सूचना हमारे काम की है जो स्पष्ट है, जिसमें तथ्य हैं और जो एक विश्वसनीय स्रोत से आई है |

जो भी आपको मैसेज करे, भले ही आपका अच्छा मित्र हो, उससे प्रश्न करें कि इसका मूल स्रोत क्या है ? विश्वसनीयता क्या है ? क्या इससे सचमुच में लाभ होगा ? क्यूंकि जब तक आप सवाल नही करेंगे, बेमतलब की सूचनाओं से आपके कीमती दिमाग की हार्ड डिस्क भरती रहेगी |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *